2027 की दस्तक: सहसवान में फिर गूंज रहा बृजेश यादव का नाम
बार विधायक रहे स्व. ओमकार सिंह यादव की विरासत से लेकर जिला सहकारी बैंक की कमान तक—मजबूत राजनीतिक परिवार की अगली कड़ी हैं बृजेश यादव

समर्थको का दावा—सहसवान में कायम है बृजेश यादव की पकड़, 2027 में फिर विधायक बनाने को जनता तैयार
सहसवान। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सहसवान की सियासत भी गर्म होने लगी है। राजनीतिक गलियारों से लेकर गांव की चौपालों तक संभावित समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है। इन चर्चाओं के केंद्र में समाजवादी पार्टी के विधायक बृजेश यादव का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है।
बृजेश यादव की राजनीतिक ताकत केवल उनके वर्तमान विधायक होने तक सीमित नहीं है। उनके पीछे एक लंबी और मजबूत राजनीतिक विरासत खड़ी है। उनके पिता स्वर्गीय ओमकार सिंह यादव सहसवान से पांच बार विधायक रहे और मंत्री के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में मजबूत पकड़ वाली इसी विरासत को बृजेश यादव आगे बढ़ा रहे हैं।
विधायक बनने से पहले भी संभाली बड़ी जिम्मेदारी
बृजेश यादव की राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण अध्याय उनके विधायक बनने से पहले का भी है। वह बदायूं जिला सहकारी बैंक के दो बार चेयरमैन रह चुके हैं। सहकारी बैंक जैसी महत्वपूर्ण संस्था की जिम्मेदारी संभालने के दौरान भी उन्होंने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अपना राजनीतिक और सामाजिक संपर्क मजबूत किया।
यही वजह है कि समर्थक बृजेश यादव को केवल सहसवान विधानसभा तक सीमित नेता नहीं मानते। उनका कहना है कि वर्षों से जनता और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय रहने के कारण जिले के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में भी बृजेश यादव के समर्थकों और शुभचिंतकों का मजबूत नेटवर्क तैयार हुआ है।
एक ही परिवार से राजनीति के कई मजबूत चेहरे
बृजेश यादव के राजनीतिक प्रभाव को समझने के लिए उनके परिवार की मौजूदा राजनीतिक सक्रियता भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनके भतीजे हिमांशु यादव वर्तमान समय में सेखूपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।
समर्थकों का मानना है कि परिवार के अलग-अलग सदस्यों की राजनीतिक सक्रियता ने जिले में जनसंपर्क का दायरा और मजबूत किया है। पिता की लंबी राजनीतिक पारी, बृजेश यादव का जिला सहकारी बैंक से लेकर विधानसभा तक का सफर और भतीजे हिमांशु यादव का विधायक होना—यह पूरा राजनीतिक परिदृश्य परिवार की मजबूत राजनीतिक मौजूदगी को दर्शाता है।
मुश्किल वक्त में साथ खड़े रहने की छवि
बृजेश यादव के समर्थक उनकी सबसे बड़ी ताकत जनता के बीच उनकी सक्रियता और व्यक्तिगत संपर्क को बताते हैं। समर्थकों का कहना है कि वह अपने साथ जुड़े लोगों के सुख-दुख में खड़े रहने का प्रयास करते हैं और जरूरत पड़ने पर तन, मन और धन से मदद करने में पीछे नहीं हटते।
इसी व्यक्तिगत जुड़ाव को उनके समर्थक उनकी राजनीति की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं। उनका दावा है कि बृजेश यादव से जुड़ा कार्यकर्ता स्वयं को केवल राजनीतिक समर्थक नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा महसूस करता है।
विरोध की सियासत अपनी जगह, जनता की आवाज अपनी जगह
राजनीति में विरोध और आरोप-प्रत्यारोप लगातार चलते रहते हैं। बृजेश यादव के विरोधी भी उन पर सवाल उठाते रहे हैं। समर्थकों का आरोप है कि राजनीतिक विरोध के कारण उन्हें बदनाम करने के प्रयास किए जाते हैं।
लेकिन बृजेश यादव के समर्थकों का कहना है कि राजनीति में अंतिम फैसला आरोप लगाने वाले नहीं, बल्कि जनता करती है।
उनका तर्क है कि सोशल मीडिया की बयानबाजी और राजनीतिक आरोपों से अलग असली तस्वीर गांव, कस्बे और जनता के बीच दिखाई देती है। समर्थकों के अनुसार, मौजूदा समय में लोगों के बीच बृजेश यादव के पक्ष में जो समर्थन दिखाई देता है, वही 2027 की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन सकता है।
2027 का सवाल—सहसवान फिर किसके साथ?
2027 विधानसभा चुनाव अभी दूर है और आने वाले समय में राजनीतिक परिस्थितियां बदल सकती हैं। लेकिन सहसवान में बृजेश यादव के समर्थक अभी से चुनावी तैयारी का माहौल बनाने में जुटे दिखाई दे रहे हैं।
समर्थकों की आवाज साफ है—“2027 में फिर बृजेश यादव।”
उनका दावा है कि जनता बृजेश यादव को दोबारा विधायक के रूप में देखना चाहती है। समर्थकों का मानना है कि स्वर्गीय ओंकार सिंह यादव की राजनीतिक विरासत, बृजेश यादव का अपना जनसंपर्क, जिला सहकारी बैंक से लेकर विधानसभा तक का अनुभव और परिवार के अन्य राजनीतिक चेहरों की सक्रियता उन्हें मजबूत स्थिति में रखती है।
विरोधियों से बड़ी होती है जनता की आवाज
सियासत में विरोधियों की अपनी भूमिका होती है, लेकिन चुनाव के मैदान में सबसे बड़ी ताकत जनता का फैसला होता है। बृजेश यादव के समर्थक इसी भरोसे के साथ 2027 की ओर देख रहे हैं।
सहसवान की सियासत में अभी से सवाल उठने लगा है—क्या 2027 में जनता एक बार फिर बृजेश यादव के नाम पर मुहर लगाएगी?
फिलहाल इसका जवाब चुनाव के नतीजे देंगे, लेकिन समर्थकों की मानें तो सहसवान में बृजेश यादव के पक्ष में “फिर एक बार” की आवाज अभी से मजबूत होती दिखाई दे रही है।




